संग्रह के कलाकार
Arnold Peter Weisz-Kubínčan
1898 उयश्चे–1945
आर्नोल्ड पेटर वाइस-कुबीनचान (Arnold Peter Weisz-Kubínčan) — ओरावा के अभिव्यंजनावादी, जिनकी कृतियाँ युद्ध के दौरान एक अटारी में रखे सूटकेस में बची रहीं। उनका जन्म प्रशिया के उयश्चे (Ujście) में एक यहूदी परिवार में हुआ और बचपन दोल्नी कुबीन (Dolný Kubín) में बीता; 1913 – 1916 में उन्होंने बुडापेस्ट के अनुप्रयुक्त कला विद्यालय में मूर्तिकला का अध्ययन किया और मोर्चे से लौटकर बर्लिन में अभिव्यंजनावाद के परिवेश में अध्ययन जारी रखा। 1923 से वे दोल्नी कुबीन में और 1934 से मार्तिन में रहे; “कुबीनचान” उपनाम उन्होंने ओरावा के प्रति अपने प्रेम की घोषणा के रूप में अपनाया — उस ओरावा के, जिसके पहाड़ और लोग ही उनकी दुनिया थे।
1942 से वे निर्वासन (डिपोर्टेशन) से बचने के लिए पहाड़ों में छिपे रहे; 1945 में यातना शिविर की ओर ले जाए जाने के दौरान या उसके कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मार्तिन में उन्होंने जो लगभग तीन सौ चित्र, रेखाचित्र और ग्राफ़िक कृतियाँ छिपाई थीं, उन्हें उनकी जीवनसंगिनी ज़ोर्का काहान-रिंग (Zorka Kahan-Ring) ने बचाया और उनकी बेटी ने उन्हें स्लोवाक राष्ट्रीय गैलरी को भेंट कर दिया, जिसने 2019 में उन्हें प्रदर्शनी “कलाकार का (भारी) सामान” (Umelcova (ťažká) batožina) में प्रस्तुत किया। उनकी कला दो विश्वयुद्धों के बीच की स्लोवाक कला की सबसे मौलिक अभिव्यक्तियों में गिनी जाती है।
इस कलाकार की कृतियाँ इस समय हमारे पास बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हैं।