संग्रह के कलाकार
Jozef Hanula
1863 लिप्तोव्स्के स्लियाचे–1944 स्पिशस्का नोवा वेस
योज़ेफ़ हानुला (Jozef Hanula) स्लोवाक गाँव और गिरजाघरों के चित्रकार थे, जिन्होंने यथार्थवाद को राष्ट्रीय विचार से जोड़ा। लिप्तोव्स्के स्लियाचे में जन्मे हानुला ने बुडापेस्ट के प्रांतीय रेखांकन विद्यालय, शिमोन होल्लोशी (Simon Hollósy) के निजी विद्यालय और म्यूनिख अकादमी में गाब्रिएल फ़ॉन हाकल (Gabriel von Hackl), फ़्रान्त्स फ़ॉन डेफ़्रेगर (Franz von Defregger) और कार्ल फ़ॉन मार (Carl von Marr) के पास अध्ययन किया; उन्होंने ज़िलिना और स्पिश्स्का नोवा वेस में रेखांकन पढ़ाया, जहाँ उन्होंने अपना शेष जीवन बिताया।
उन्होंने विश्न्योवे (1901), बान्स्का बिस्त्रित्सा (1935), सासोवा और राद्वान्य के गिरजाघरों के आंतरिक भागों को चित्रित किया, राष्ट्रीय जीवन की हस्तियों के पोर्ट्रेट बनाए और 1908 से बच्चों के लिए स्लोवाक चित्रांकन के अग्रदूतों में थे। 1919 में उन्होंने मार्तिन में स्लोवाक कलाकार संघ (Spolok slovenských umelcov) की सह-स्थापना की, 1941 में उन्हें राज्य पुरस्कार मिला; उनके संस्मरण “एक स्लोवाक चित्रकार की स्मृतियाँ” (Spomienky slovenského maliara) शीर्षक से प्रकाशित हुए। उनका 1933 का आत्म-चित्र स्लोवाक राष्ट्रीय गैलरी में संरक्षित है।
इस कलाकार की कृतियाँ इस समय हमारे पास बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हैं।