संग्रह के कलाकार
Miloš Alexander Bazovský
1899 तुरानी–1968 त्रेन्चीन
मिलोश अलेक्सांदर बाज़ोव्स्की (Miloš Alexander Bazovský) स्लोवाक भूदृश्य के गाथाकार और स्लोवाक आधुनिकतावाद के संस्थापकों में से एक थे। मार्तिन के निकट तुरानी में जन्मे बाज़ोव्स्की ने बुडापेस्ट की ललित कला अकादमी में इश्त्वान रेती (István Réti) के पास, प्राग अकादमी में व्लाहो बुकोवाच (Vlaho Bukovac), माक्स पिर्नर (Max Pirner) और याकुब ओब्रोव्स्की (Jakub Obrovský) के पास तथा वियना के एक निजी चित्रकला विद्यालय में अध्ययन किया; 1924 में उन्होंने तुरानी में अपना पहला स्टूडियो खोला, 1929 में पेरिस में फ़्रांसीसी आधुनिक कला का अध्ययन किया और 1931 से मार्तिन में काम किया, जिसे उन्होंने यान्को अलेक्सी (Janko Alexy) और ज़ोलो पालुद्याय (Zolo Palugyay) के साथ मिलकर स्लोवाक कला-जीवन के केंद्र में बदल दिया।
लोक-कला और देत्वा, ओरावा तथा लिप्तोव के गाँवों से उन्होंने स्लोवाकिया की एक सम्मोहक, गीतात्मक संक्षेप वाली छवि रची — “देत्वा की धुन”, “पीला पुल” या “गाँव में शाम” उनके सबसे प्रसिद्ध कैनवासों में हैं। 1961 में वे “सम्मानित कलाकार” और 1964 में “राष्ट्रीय कलाकार” बने; 1962 से वे त्रेन्चीन में रहे, जहाँ उनकी मृत्यु के एक वर्ष बाद मिलोश अलेक्सांदर बाज़ोव्स्की गैलरी की स्थापना हुई। स्लोवाक नीलामियों में उनके चित्र सबसे अधिक माँग वाले चित्रों में गिने जाते हैं।
इस कलाकार की कृतियाँ इस समय हमारे पास बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हैं।