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पर्वतीय परिदृश्य — Imro Weiner-Kráľ
कृति का एक और दृश्यकृति का एक और दृश्य

INVESTinART संग्रह · चित्र · 15 × 21 cm

पर्वतीय परिदृश्य

मूल शीर्षक: “Horská krajina”

Imro Weiner-Kráľ

1901 पोवाझस्का बिस्त्रित्सा1978 ब्रातिस्लावा

कृति के बारे में

पर्वतीय परिदृश्य — स्लोवाक अतियथार्थवाद (सर्रियलिज़्म) के अग्रदूत इम्रो वाइनर-क्राल (Imro Weiner-Kráľ) का पेंसिल और जलरंग में काग़ज़ पर एक छोटी, अंतरंग कृति। इस कलाकार की काग़ज़ पर बनी कृतियाँ बाज़ार में उनके तैलचित्रों की तुलना में कहीं अधिक दुर्लभ हैं; इसलिए 15 × 21 cm का लघु प्रारूप स्लोवाक आधुनिकतावाद की प्रमुख हस्तियों में से एक — पेरिस में प्रशिक्षित चित्रकार, फ़्रांसीसी प्रतिरोध आंदोलन के सहभागी और स्लोवाक अतियथार्थवाद की पहली प्रदर्शनी (1936) के रचयिता — की हस्तलिपि पाने का अवसर है।

वाइनर-क्राल उन नामों में से हैं जिनके यहाँ स्लोवाक कला-इतिहास यूरोपीय कला-इतिहास से मिलता है: उनके पेरिस के वर्ष, अतियथार्थवादी कल्पनाशीलता और प्रतिरोध आंदोलन में एक यहूदी कलाकार की नियति उन्हें ऐसा व्यक्तित्व बनाती है जिस पर मोनोग्राफ़ लिखे जाते हैं और वृत्तचित्र बनाए जाते हैं। जहाँ उनके तैलचित्र दसियों हज़ार की राशियों तक पहुँचते हैं, वहीं काग़ज़ पर बनी कृतियाँ सुलभ बनी हुई हैं — और प्रायः वही उनके हाथ का सबसे प्रत्यक्ष अभिलेख धारण करती हैं।

कैटलॉग विवरण

कलाकार
Imro Weiner-Kráľ
वर्ष
1960
माध्यम
कागज़ पर पेंसिल और जलरंग
हस्ताक्षर
नीचे दाईं ओर हस्ताक्षरित
आयाम (फ़्रेम रहित)
15 × 21 cm
आयाम (फ़्रेम सहित)
कैटलॉग में उल्लिखित नहीं — मापन के बाद जोड़ा जाएगा
उद्गम
नीलामी घर, स्लोवाक गणराज्य
Imro Weiner-Kráľ

कलाकार के बारे में

Imro Weiner-Kráľ

1901 पोवाझस्का बिस्त्रित्सा1978 ब्रातिस्लावा

स्लोवाक अतियथार्थवाद के पहले और सबसे मौलिक प्रतिनिधि — और ऐसे चित्रकार, जिनका जीवन-वृत्त किसी उपन्यास जैसा है। प्राग, डसेलडोर्फ़, बर्लिन और पेरिस की अकादमियों में अध्ययन के बाद उन्होंने 1936 में फ़्रांतिशेक माली (František Malý) के साथ मिलकर स्लोवाकिया की पहली अतियथार्थवादी प्रदर्शनी आयोजित की। देश छोड़ने के बाद पेरिस में वे दस्तावेज़ों की जालसाज़ी के ज़रिए फ़ासीवाद-विरोधी प्रतिरोध में शामिल हुए, जिसके लिए फ़्रांस ने 1947 में उन्हें अलंकरण से सम्मानित किया।

लौटने के बाद कम्युनिस्ट शासन ने 1951 में उन्हें क़ैद कर लिया — पर क़ैद में भी उन्होंने पैंतालीस चित्र बना डाले। स्वप्निल बिंब-विधान, स्लोवाक ग्रामीण अंचल के दृश्यों और चित्र-शृंखला “यहूदी गली” — लुप्त हो चुके एक संसार की शोकगाथा — के ज़रिए उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। हमारे संग्रह का जलरंग चित्र “पर्वतीय लैंडस्केप” उनकी संवेदनशील लैंडस्केप-शैली को दर्शाता है।

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“पर्वतीय परिदृश्य” — Imro Weiner-Kráľ

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